कोरोना संग जिन्दगी

 


चल पडी है सडकों पर दौड़ती हुई जिन्दगी
मैटो की रफ्तार संग भागती हुई जिन्दगी
अलसाई सुबह में भी जागती हुई जिन्दगी
नए रंग में रंगी हुई सी लग रही है जिन्दगी 
भय है कोरोना का डर भी रही है जिन्दगी 
मास्क-सेनेटाइजर ले निकल पडी है जिन्दगी 

        ✍डाॅ ममता श्रीवास्तवा,सरूनाथ 


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