मलाल

 सुप्रभात दोस्तों

एक लंबे अरसे के बाद आज फिर कलम चल पड़ी है, ममता भरे जज़्बात लेकर सोचा कि आप सभी से साझा किया जाए। क्या आप सभी भी ऐसा ही महसूस कर रहे हैं।

जाने वाला साल अपने अंतिम पड़ाव पर है ऐसे समय में सोच रही हूं कि कितना कुछ और करने की चाहत थी इस साल में लेकिन कुछ काम अधूरे रह गए वक्त और हालात की वजह से तो कुछ कल करूंगी इस चक्कर में। 

ऐसे समय में सिर्फ इतना ही कहना चाहती हूं-----

जो बीत गया उस वक्त का किंचित ना तुम मलाल करो

हर दिन नया सवेरा है उठो नया आगाज करो 

       डॉ ममता श्रीवास्तवा (सरूनाथ)


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