दोषी कौन

सदियों से महिलाओं को कोसता आया है हमारा समाज, लेकिन आज तक एक बात समझ नहीं आई कि इतनी कामुकता सिर्फ पुरुषों में ही क्यों है ,जो पशुता की ओर धकेल देती है समाज को ।
एक लड़की, जो न जाने कितने सपने संजोए हुए जीने की कोशिश करती है और अचानक एक दिन बाज की तरह, झपट पड़ता है एक ऐसा पुरुष, जो खुद पर काबू नहीं रख पाता और परिवार का मुखिया कहलाने की चाहत रखता है ।
हाथरस में हुई जघन्य घटना की जिम्मेदारी कौन लेगा हमारा सोकाॅल्ड समाज जो पुरुष प्रधान है ,धर्म के ठेकेदार ,या नेता जो दलितों के वोट पर अपनी सरकार बनाते हैं या एक बार फिर जिम्मेदार ठहरा दिया जाएगा उस लड़की को कि उसका सबसे बड़ा अपराध ये है कि वो लड़की है और वो भी दलित।

Comments

  1. बेहद दुखद व दर्दनाक घटना हुई है। इसकी भर्त्सना करता हूँ। आरोपियों को फाँसी होनी चाहिए ।

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  2. हाथरस की नहीं व्व पूरे भारत की बेटी थी।इतनी जघन्य वारदात ? निर्भया कर बाद सोचा तहस शायद कुछ त्तम जाएगा।और नहीं उसके बाद तो दरिंदगी की बाढ़ सी आती चली गई।
    आखिर कब तक इन जघन्य कुकृत्यों को हम झेलते रहेंगे?
    कारण सिर्फ एक है दोषियों के लिए तुरत दंड का कोई विधान नहीं।
    आखिर क्यों ऐसे दोषियो को हमारे देश मे पाला पोशा जाता है ।ऐसे अपराधियो को संरक्षण और सहानुभूति दोनो मिलती रही हैं ।न्याय व्यवस्था ही इतनी लचर है कि पहले तो दोषी पकड़े ही नही जाते ।जकड़ लिया तो जमानत पहले से पहले मिल जती है।जब सब कुछ आईने की तरह साफ है और दोषी गिरफ्त में है ति उन्हें तुरंत फांसी दे देनी चाहिए।
    दरिंदों और हैवानों को इस देश मे क्या दुनियां के किसी भी कोने में रहने कस हक़ नहीं।

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    1. बिलकुल सही कहा है आपने दीदी ऐसे दरिन्दों के खिलाफ त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए।

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  3. एकदम सही कहा आपने ममता जी

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  4. धर्म को हमारे नेताओं ने सिर्फ वोट बैंक की तरह हर बार इस्तेमाल किया है। इनका इससे कोई लेना देना नही है कि कौन मरा। मैं इसको किसी भी जाती से नही समझता हूँ सिर्फ इतना समझता हूं कि यह हमारे समाज के लिये सबसे बड़ी पीड़ा दायक है चाहे वह किसी के भी घर मै घटित हुआ हो। हमारे देश मै सबसे सस्ती वस्तु मौत है।
    इन लोगो को सिर्फ और सिर्फ गोली ही मरना चाहिये। जो इन लोगो का बचाव करे उन लोगो का भी यही हस्ल होना चाहिये।

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